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रायपुर

तेज आवाज की मार: कानों से दिमाग और दिल तक असर, हाईकोर्ट ने सरकार को दिए शोर नियंत्रण के सख्त निर्देश… यहां समझें सबकुछ

Hearing Loss: आज के दौर में शोर सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह केवल कानों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि दिल, दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है।

रायपुरAug 23, 2025 / 03:58 pm

Khyati Parihar

तेज आवाज की मार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

तेज आवाज की मार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Hearing Loss: आज के दौर में शोर सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह केवल कानों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि दिल, दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शोर प्रदूषण को “साइलेंट किलर” माना है, क्योंकि इसके प्रभाव धीरे-धीरे और बिना चेतावनी के सामने आते हैं।

Hearing Loss: हर साल 10-15% केस हियरिंग लॉस के

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा की जिंदगी में तेज आवाजों के लगातार संपर्क में आने से 10-15% तक लोग सुनने की क्षमता खो रहे हैं। यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं और बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है।
  • मोबाइल पर तेज आवाज़ में लंबे समय तक हेडफोन/ईयरफोन का इस्तेमाल।
  • शादी-ब्याह, जुलूस, पार्टियों में डीजे और लाउडस्पीकर।
  • फैक्ट्री और ट्रैफिक का शोर।
ये सब मिलकर कानों की संवेदनशील कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। एक बार जब ये कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, तो दोबारा विकसित नहीं होतीं, यानी सुनने की क्षमता स्थायी रूप से घट जाती है।

बलरामपुर का मामला: डीजे की तेज आवाज से ब्रेन हेमरेज

पिछले साल बलरामपुर के 40 वर्षीय व्यक्ति के डीजे की तेज धुन के बाद ब्रेन हेमरेज से मौत ने सभी को चौंका दिया था। यह इकलौता केस नहीं है, बल्कि डॉक्टरों के अनुसार डीजे व लाउड स्पीकर की तेज धुन के बाद हार्ट अटैक व ब्रेन हेमरेज जैसे केस भी आने लगे हैं। आंबेडकर अस्पताल के ईएनटी विभाग में रोजाना 150 के आसपास मरीजों का इलाज किया जाता है। इनमें 10 से 15 मरीज हियरिंग लॉस वाले होते हैं। विशेष सीजन में इनकी संख्या बढ़कर दोगुनी हो जाती है। यह घटना बताती है कि शोर का असर सिर्फ कानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है।
केस- 1. 27 वर्षीय युवक शादी समारोह में डीजे में घंटों नाचता रहा। कान से कम सुनाई देने का अहसास हुआ तो ईएनटी डॉक्टर के पास इलाज कराने गया। जरूरी जांच में पता चला कि एक कान में सुनने की क्षमता कम हो गई है। अब उन्हें हियरिंग डिवाइस लगानी पड़ रही है।
केस- 2. 61 वर्षीय व्यक्ति हाइपरटेंशन का मरीज था। डीजे की धुन के बीच गश्त खाकर गिर पड़ा। परिजन भौंचक रह गए। अस्पताल जाने से पता चला कि डीजे की तेज धुन से उसकी धड़कन अचानक तेज हो गई है। डॉक्टर ने उन्हें डीजे व तेज शोर से दूर रहने कहा है।
Hearing Loss

15 से 20 मरीज रोजाना पहुंच रहे अस्पताल

राजधानी के डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में ब्रेन हेमरेज से मिलते-जुलते केस लगातार सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अभी तक किसी मरीज की मौत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तेज आवाज और ध्वनि प्रदूषण इसके पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। कार्डियोलॉजी और मेडिसिन विभाग में भी ब्लड प्रेशर अप-डाउन के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। यहां रोजाना 15 से 20 मरीज शोर और तनाव से जुड़े लक्षणों के साथ इलाज के लिए आते हैं। वहीं, मेडिसिन और कार्डियोलॉजी की ओपीडी में रोजाना 500 से ज्यादा मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं।

Hearing Loss: हाईकोर्ट भी दे चुका है निर्देश

लगातार बढ़ते शोर प्रदूषण को देखते हुए हाईकोर्ट समय-समय पर कोलाहल अधिनियम के तहत दिशा-निर्देश जारी करता रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, कान के लिए 70 डेसिबल या इससे कम ध्वनि सुरक्षित मानी जाती है। सामान्य बातचीत की ध्वनि करीब 60 डेसिबल होती है।

हाईकोर्ट ने दिया है तीन सप्ताह का समय

हाईकोर्ट ने सरकार को कोलाहल नियंत्रण अधिनियम लागू करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया है। नए नियमों के तहत 5 लाख रुपए तक की पेनाल्टी का प्रावधान किया जा रहा है। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि डीजे, वाहन-माउंटेड साउंड सिस्टम पर लेजर लाइट का उपयोग पहले से प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

शोर स्तर और खतरे

85 डेसिबल या इससे ज्यादा की ध्वनि से कान पर साइड इफेक्ट पड़ता है। वहीं 120 डेसिबल की आवाज़ से असुविधा हो सकती है। 140 डेसिबल से कान में दर्द हो सकता है। 120 डेसिबल की आवाज व्यक्ति या बच्चों को बहरा बना सकता है। पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) के अनुसार 24 घंटे में शोर का स्तर 70 डेसिबल से नीचे रहना चाहिए।
नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार डीजे के लेजर की लाइट बच्चों की आंख के लिए खतरनाक है। ये बच्चों को अंधा बना सकता है। आंबेडकर अस्पताल में नेत्र रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रेशु मल्होत्रा के अनुसार लेजर लाइट से बच्चों को दूर रख्रें। आंखों के नुकसान के केस आते रहे हैं।

कहां-कितने शोर की अनुमति

इलाके- दिन- रात
रिहायशी – 55 – 45
साइलेंस जोन – 50 – 40
इंडस्ट्रियल – 75 – 70
कॉमर्शियल – 65 – 55
सोर्स- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

दिल और दिमाग पर असर

  1. हार्ट अटैक का खतरा: लगातार शोर से सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम ज्यादा सक्रिय रहता है। इसका असर दिल पर पड़ता है और अचानक हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
  2. हाई ब्लड प्रेशर: 65 डेसिबल से ऊपर का शोर लंबे समय तक सहने से ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।
  3. नींद की समस्या: नींद पूरी न होने से मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसी दिक्कतें।
  4. बच्चों पर असर: पढ़ाई के दौरान ध्यान की कमी और मानसिक विकास में बाधा।

क्या करें बचाव के लिए?

  • ईयरफोन/हेडफोन का इस्तेमाल 60-60 नियम से करें (आवाज़ 60% से कम और 60 मिनट से ज्यादा नहीं)।
  • सार्वजनिक समारोहों में तय सीमा से अधिक डीजे और लाउडस्पीकर न बजाएं।
  • बच्चों और बुजुर्गों को तेज आवाज़ से बचाकर रखें।
  • फैक्ट्री/वर्कशॉप जैसे स्थानों पर ईयरप्लग या इयरमफ जरूर इस्तेमाल करें।
  • रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर का इस्तेमाल पूरी तरह बंद होना चाहिए।

टॉपिक एक्सपर्ट

डीजे की तेज आवाज से हाई ब्लड प्रेशर व हार्ट के हाजे का तेज आवाजट मरीजों को दिक्कत होने के केस आते रहे हैं। कई मरीज चक्कर खाकर गिर भी सकते हैं। खासकर विशेष मौकों पर डीजे का ज्यादा उपयोग होता है। इससे दूर रहने में भलाई है। -डॉ. कृष्णकांत साहू, एचओडी कार्डियक सर्जरी नेहरू मेडिकल कॉलेज
तेज ध्वनि कान की सुनने की क्षमता प्रभावित कर लोगों को बहरा बना रहा है। खासकर बच्चों को तेज ध्वनि से दूर रखें। डीजे बच्चों या किसी भी उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। खासकर बच्चों को डीजे व तेज ध्वनि से दूर रखें। – डॉ. सुनील रामनानी, सीनियर ईएनटी सर्जन
तेज आवाज से ब्लड प्रेशर अप-डाउन हो सकता है। इससे ब्रेन हेमरेज हो सकता है। तेज आवाज दिमाग के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। पिछले साल बलरामपुर में इस तरह के केस आए थे, जो चौंकाने वाले थे। डीजे पर प्रतिबंध लगे। – डॉ. अभिजीत कोहट, एचओडी न्यूरोलॉजी विभाग डीकेएस

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