विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर में रोजाना तड़के 4 बजे महाकाल भस्म आरती होती है। ऐसे में मंदिर समिति हर रोज 1700 भक्तों को भस्म आरती के दर्शन की अनुमति देती है। भस्म आरती दर्शन के लिए भक्तों को नंदी, गणेश और कार्तिकेय मंडपम् में बैठने की व्यवस्था की जाती है। लेकिन, भक्तों को ये जानकारी नहीं रहती कि, उन्हें बैठाया कहां जाएगा। इसी व्यवस्था के चलते आए दिन भक्तों और प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है।
आए दिन बन रहे विवाद के हालातों पर लगेगी लगाम
भक्तों के बीच भी आए दिन धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती है। मंदिर में प्रवेश करने के बाद कई भक्त आगे बैठने को लेकर विवाद करते हैं। भस्म आरती की नई दर्शन व्यवस्था प्रथम आओ प्रथम पाओ के आधार पर होगी। पहले आवेदन करने वाले अग्रिम पंक्ति में बैठेंगे। इसके बाद जैसे जैसे आवेदन प्राप्ति होगी उसी आधार पर उन्हें बैठने का स्थान दिया जाएगा। नई व्यवस्था इस मिथक को भी तोड़ देगी कि वीवीआईपी ही सबसे आगे बैठकर भस्म आरती दर्शन करते हैं।
श्रद्धालु को पहले ही पता होगा कि वो कहां बैठेगा
मामले को लेकर उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह का कहना है कि, भस्म आरती दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्थान तय करने की व्यवस्था बना रहे हैं। दर्शन बुकिंग के साथ ही श्रद्धालुओं को यह भी पता लग जाएगा कि उन्हें कहां बैठना है। व्यवस्था को लेकर तैयारियां जारी है। मंदिर में अन्य तकनीकी नवाचार भी किए जा रहे हैं।