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मेरठ

गंगा एक्सप्रेस-वे का होगा विस्तार, 150 किलोमीटर और बढ़ेगी लंबाई, हरिद्वार तक बढ़ाया जा रहा

गंगा एक्सप्रेस को अब मेरठ से हरिद्वार तक बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण में मेरठ से प्रयागराज तक 6 लेन एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है। वहीं अब मेरठ से हरिद्वार तक इसे बढ़ाया जाएगा। इस विस्तार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट भी जारी कर दिया है।

मेरठAug 27, 2025 / 07:54 pm

Avaneesh Kumar Mishra

मेरठ से हरिद्वार तक बढ़ाया जा रहा गंगा एक्सप्रेस-वे।

उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक, गंगा एक्सप्रेसवे, अब और विस्तारित होने जा रही है। यह एक्सप्रेसवे, जो मूल रूप से मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा बनाया जा रहा था, अब हरिद्वार तक बढ़ाया जाएगा। इसके लिए 110 से 150 किलोमीटर लंबा 6 लेन का नया हाईवे बनाया जाएगा, जिसका सर्वे कार्य पूरा हो चुका है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।
इस विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा, साथ ही धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक विकास को भी बल मिलेगा। मेरठ से मुजफ्फरनगर और रुड़की के रास्ते हरिद्वार तक जाने वाला यह नया खंड चारधाम यात्रा से जुड़ेगा, जिससे धार्मिक पर्यटकों के लिए यात्रा आसान हो जाएगी। इस रूट पर पड़ने वाले गांवों में जमीनों की कीमतों में भी भारी उछाल की उम्मीद है, क्योंकि यह क्षेत्र अब एक प्रमुख आर्थिक गलियारे का हिस्सा बनने जा रहा है।

विस्तार के लिए जारी किए 50 करोड़ रुपए

गंगा एक्सप्रेसवे के पहले चरण का निर्माण, जो मेरठ से प्रयागराज तक है, अपने अंतिम दौर में है और 93 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीईडीए) के अनुसार, इस चरण का उद्घाटन 15 दिसंबर 2025 तक होने की संभावना है। इस 594 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे को बनाने में अब तक 36,230 करोड़ रुपये की लागत आई है, जिसमें भूमि अधिग्रहण के लिए 9,500 करोड़ रुपये शामिल हैं।
पहले चरण के पूरा होने के बाद, मेरठ से हरिद्वार तक दूसरे चरण का निर्माण शुरू होगा। नोएडा की एसए इंफ्रा कंपनी डीपीआर तैयार कर रही है और अगले चार महीनों में इसे यूपीईडीए को सौंप देगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इस विस्तार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट भी जारी कर दिया है।

लखनऊ से हरिद्वार 5 से 6 घंटे में तय होगी दूरी

यह एक्सप्रेसवे न केवल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नया आयाम देगा। एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर, फार्मा पार्क, टेक्सटाइल पार्क, और आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जो उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार उत्पाद भेजने के लिए सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। इसके अलावा, रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज और शॉपिंग सिटी भी बसाई जा रही हैं, जिससे मेरठ, हापुड़, शाहजहांपुर, और हरदोई जैसे क्षेत्रों में रियल एस्टेट की मांग बढ़ने की संभावना है। पर्यटन के लिहाज से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़कर एनसीआर को पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से जोड़ेगा। इससे मेरठ से प्रयागराज की यात्रा 6-7 घंटे और लखनऊ से हरिद्वार की यात्रा 5-6 घंटे में पूरी हो सकेगी।

18.5 लाख लगाए जाएंगे पौधे

पर्यावरणीय उपायों के तहत, एक्सप्रेसवे के आसपास 18,55,000 पौधे लगाए जाएंगे और सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा। साथ ही, शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी बनाई गई है, जो सैन्य आपातकालीन लैंडिंग के लिए उपयोगी होगी। हालांकि, हरिद्वार विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण और गंगा व रामगंगा नदियों के पास निर्माण से पर्यावरणीय चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। फिर भी, यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच एक मजबूत सामाजिक और आर्थिक कॉरिडोर के रूप में उभरेगा, जो क्षेत्रीय विकास को नई गति देगा।

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