महिंद्रा मराज्जो (Mahindra Marazzo)
Mahindra Marazzo भारतीय बाजार में लंबे समय से बिना किसी अपडेट के बिक्री के लिए मौजूद है। इसे 2018 में लॉन्च किया गया था। मार्केट में एंट्री करने के बाद से इसकी डिमांड लगातार गिरती गई। 2025 की पहली छमाही में सिर्फ 54 यूनिट्स ही बिक पाईं जिससे यह भारत की सबसे बड़ी फ्लॉप कार बन गई है।
सिट्रोएन C5 एयरक्रॉस (Citroen C5 Aircross)
फ्रेंच ब्रांड सिट्रोएन की फ्लैगशिप एसयूवी भी भारतीय ग्राहकों को लुभाने में नाकाम रही है। ज्यादा प्राइस और ब्रांड पर भरोसे की कमी के कारण 6 महीनों में सिर्फ 57 गाड़ियां ही बिक पाई हैं।
निसान एक्स-ट्रेल (Nissan X-Trail)
CBU (इंपोर्टेड) यूनिट के तौर पर आने वाली यह एसयूवी बेहद महंगी पड़ती है। बिक्री के आंकड़े इतने कमजोर रहे कि कई महीनों में एक भी कार नहीं बिकी। जनवरी से जून 2025 तक सिर्फ 111 यूनिट्स ही ग्राहकों तक पहुंच सकी हैं।
फॉक्सवैगन टिगुआन (Volkswagen Tiguan)
सेफ्टी फीचर्स से लैस होने के बावजूद इसका हाई प्राइस टैग ग्राहकों को रास नहीं आया है। लोग 40 लाख की जगह 10-15 लाख में सुरक्षित और बेहतर ऑप्शन की तरफ जा रहे हैं। 6 महीनों में इसकी केवल 115 यूनिट्स ही बिकी हैं।
सिट्रोएन C3 एयरक्रॉस (Citroen C3 Aircross)
भारत में सिट्रोएन की तीसरी कोशिश भी नाकाम रही है। ज्यादा फीचर्स और बेहतर क्वालिटी देने की बजाय कंपनी ने प्राइसिंग पर फोकस किया जो ग्राहकों को पसंद नहीं आया और हाल ये है पहली छमाही में सिर्फ 334 गाड़ियां ही बिक पाई हैं। एमजी ग्लॉस्टर (MG Gloster)
कंपनी ने इसे फॉर्च्यूनर के विकल्प के रूप में पेश किया लेकिन 50 लाख की प्राइस रेंज में लोग फॉर्च्यूनर को ही तरजीह देते हैं। मई 2025 में एक भी यूनिट नहीं बिकी और जनवरी से जून तक कुल 341 यूनिट्स की ही बिक्री हुई है।
मारुति इनविक्टो (Maruti Suzuki Invicto)
मारुति इनविक्टो को 2023 में लॉन्च किया गया था लेकिन यह कार ग्राहकों के बीच उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई है। असल में यह टोयोटा हाईक्रॉस का ही रीबैज्ड वर्जन है, जिसकी वजह से इसमें कोई खास यूनिकनेस नजर नहीं आती है। लगभग 30 लाख की कीमत वाली इस गाड़ी से लोग प्रीमियम सेगमेंट की कारें लेना ज्यादा पसंद करते हैं। यही कारण है कि 2025 की पहली छमाही में इसकी बिक्री सिर्फ 1918 यूनिट्स तक सिमट गई और यह फ्लॉप कारों की लिस्ट में शामिल हो गई।
सिट्रोएन बेसाल्ट (Citroen Basalt)
सिट्रोएन की तरफ से ही कूपे एसयूवी के तौर पर लॉन्च की गई यह कार एक्सपेरिमेंटल लगती है। भारतीय ग्राहक इस डिजाइन और कंपनी पर भरोसा नहीं कर पाए। जनवरी से जून तक सिर्फ 573 यूनिट्स की ही बिक्री हुई हैं।
जीप मेरिडियन (Jeep Meridian)
जीप की यह प्रीमियम SUV भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। इनोवा और फॉर्च्यूनर जैसे दमदार कंपटीटर्स के आगे यह टिक नहीं पाई और इस साल की पहली छमाही में सिर्फ 700 यूनिट्स ही बिकी हैं। जीप कंपास (Jeep Compass)
पुराना डिजाइन, महंगी कीमत और अपडेट्स की कमी ने इस SUV को पीछे धकेल दिया। जनवरी से जून तक इसकी सिर्फ 834 यूनिट्स ही बिकी हैं। भारत जैसे बड़े बाजार में सिर्फ नाम और ब्रांड ही काफी नहीं है। यहां ग्राहक क्वालिटी, प्राइस और आफ्टर सेल्स सर्विस को देखकर ही गाड़ी चुनते हैं। यही वजह है कि मारुति जिम्नी जैसी चर्चित गाड़ी भी लिस्ट में जगह बनाने से नहीं बच पाई और सिट्रोएन जैसी नई कंपनियां लगातार संघर्ष कर रही हैं। आपको जानकर हैरानी होगी जापान में जिम्नी का वोटिंग पीरियड 1 साल से भी ऊपर है।