2020 तक नक्सलियों को हो चुका रहता सफाया
शाह ने दावा किया कि यदि यह न हुआ होता तो 2020 तक उग्रवाद का सफाया हो चुका होता। कोच्चि के एक कार्यक्रम में सवाल-जवाब सत्र के दौरान शाह ने कहा, विपक्ष ने वामपंथियों के दबाव में आकर उपराष्ट्रपति पद के लिए ऐसे उम्मीदवार को चुना है, जिसने सुप्रीम कोर्ट जैसे मंच का इस्तेमाल नक्सलवाद को समर्थन देने के लिए किया। यह वही सज्जन हैं, जिन्होंने ‘सलवा जुडूम’ को भंग करने जैसा फैसला दिया था। वहीं, इन्हें चुनने के बाद केरल में कांग्रेस के जीतने की जो बची-खुची संभावनाएं थीं, वह भी खत्म हो चुकी हैं। जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद उप-राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और इंडिया ब्लॉक समर्थित जस्टिस रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला होगा। चुनाव 9 सितंबर को होगा और उसी दिन मतगणना भी होगी। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 25 अगस्त है।
क्या था वह फैसला
साल 2011 में जस्टिस रेड्डी और जस्टिस एसएस निज्जर की पीठ ने छत्तीसगढ़ सरकार के सलवा जुडूम संगठन अभियान को भंग कर दिया था। इस संगठन में छत्तीसगढ़ सरकार ने माओवादी विद्रोह का मुकाबला करने के लिए आदिवासी युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) के रूप में नियुक्त किया था। अदालत ने फैसले में कहा था कि यह मिलिशिया संगठन अवैध और असंवैधानिक है।