हल्दी वाला दूध
हल्दी में एंटीसेप्टिक और हीलिंग गुण होते हैं। रात में गुनगुना हल्दी वाला दूध पीना न सिर्फ गले के दर्द को शांत करता है बल्कि इम्यूनिटी भी मजबूत करता है। शहद
शहद को नैचुरल कफ सिरप कहा जाता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण गले में होने वाली जलन और खराश को कम करते हैं। इसे गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर लेना गले पर कोटिंग बनाता है और आराम देता है।
लहसुन
लहसुन को प्राकृतिक एंटी-बायोटिक कहा जाता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल तत्व गले के संक्रमण को दूर करते हैं। इसे कच्चा खाने या पानी में उबालकर पीने से गले को आराम मिलता है।
अदरक की चाय
अदरक को प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी माना जाता है। इसकी चाय गले की सूजन को कम करती है और जकड़ा हुआ कफ ढीला कर देती है। दिन में एक-दो बार अदरक की चाय पीना गले के लिए तुरंत सुकून देने वाला उपाय है।
गुनगुना नमक पानी
गरम पानी में नमक डालकर गरारे करना पुराना लेकिन बेहद असरदार उपाय है। यह गले की सूजन को घटाता है और कफ को बाहर निकालने में मदद करता है। दिन में 2–3 बार नमक पानी से गरारे करने से गला जल्दी ठीक होता है।
तुलसी की पत्तियां
तुलसी का काढ़ा या इसकी चाय गले की खराश के लिए रामबाण है। तुलसी के पत्तों को उबालकर पीने से गला साफ होता है और कफ धीरे-धीरे कम होने लगता है। डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।