मशहूर गायिका ऋचा शर्मा (फोटो सोर्स ऋचा इंस्टाग्राम)
Richa Sharma Struggle: बॉलीवुड में ऋचा शर्मा का नाम सुनते ही ‘साजन के घर जाना है’, ‘माही वे’, और ‘छलका, छलका रे’ जैसे गानों की मधुर आवाज कानों में गूंजने लगती है। उनकी आवाज ने लाखों दिलों को छुआ, लेकिन इस शोहरत के पीछे एक लंबा संघर्ष और मेहनत की कहानी छिपी है।
ऋचा का जन्म 29 अगस्त 1980 को हरियाणा के फरीदाबाद में हुआ। उनके पिता पंडित दयाशंकर एक मशहूर कथावाचक और शास्त्रीय गायक थे। बचपन से ही ऋचा को संगीत से गहरा लगाव था। उनके पिता ने उन्हें संगीत की बारीकियां सिखाईं और हर सुबह रियाज करवाया। छोटी उम्र में ही ऋचा ने जगरातों में गाना शुरू किया, ताकि परिवार की आर्थिक मदद कर सकें। यहीं से उनके करियर की शुरुआत हुई, जब उन्हें अपने पहले गाने के लिए सिर्फ 11 रुपये मिले।
ये 11 रुपये भले ही छोटी रकम थे, लेकिन ऋचा के लिए बेहद खास थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी पहली कमाई को आज भी संभालकर रखा है। यह रकम उनके लिए न सिर्फ उनकी मेहनत की याद है, बल्कि उनके सपनों की शुरुआत का प्रतीक भी है।
सिंगर ऋचा शर्मा (सोर्स: ऋचा इंस्टाग्राम)
निर्देशक सावन कुमार ऋचा को दिया मौका
ऋचा ने अपनी शिक्षा के साथ-साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत की भी ट्रेनिंग ली। उन्होंने दिल्ली के गंधर्व महाविद्यालय से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। 1994 में ऋचा ने मुंबई आकर अपने सपनों को पूरा करने की ठानी। मुंबई में शुरुआती दिनों में उन्होंने कई ऑडिशन दिए, लेकिन कहीं चांस नहीं मिला। एक बार की बात है कि ऋचा को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम माता की चौकी में गाने के लिए बुलाया गया था। यहां निर्देशक सावन कुमार को उनकी आवाज बहुत पसंद आई और उन्होंने ऋचा शर्मा को 1996 में रिलीज हुई अपनी फिल्म ‘सलमा पे दिल आ गया’ में गाने का मौका दे दिया।
करियर में बड़ा मोड़
ऋचा शर्मा के करियर में उस वक्त बड़ा मोड़ आया, जब 1999 में उन्होंने एआर रहमान की फिल्म ‘ताल’ में ‘नी मैं समझ गई’ गाना गाया। इस गाने को लोगों ने बेहद पसंद किया और ऋचा को बॉलीवुड में एक अलग पहचान मिली।
इसके बाद उन्होंने कई बड़ी फिल्मों के लिए गाने गाए, जिनमें ‘जन्नत’, ‘साथिया’, ‘माई नेम इज खान’ और ‘कल हो ना हो’ शामिल हैं। उनकी आवाज की खासियत यह है कि वे हर तरह के म्यूजिक में खुद को एडजस्ट कर सकती हैं। चाहे वह क्लासिकल हो या सूफी, भजन हो या रोमांटिक गीत, हर तरह के गाने में ऋचा की आवाज का उनके फैंस पर जादू सा असर होता है।
ऋचा की कामयाबी का श्रेय
ऋचा अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पिता को देती हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि ‘अगर तुम्हें प्लेट में बनी बनाई रोटी मिल जाएगी, तो क्या मजा? मजा तो तब है, जब तुम खुद बीज बो, काटो, पीसो, पकाओ और फिर खाओ।’ उनके पिता उन्हें ‘झांसी की रानी’ कहा करते थे।