मदद मांगने पर भी पुलिस ने मदद नहीं की
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार ने रूमा के हवाले से बताया, “हत्या वाले दिन, हमने कई बार 999 डायल कर के पुलिस से मदद मांगी। लेकिन, पुलिस की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। वे हत्या के बाद घटनास्थल पर आए।”
इमारत को लेकर विवाद हो गया (Building dispute murder Bang)
उन्होंने बताया कि उनके परिवार और उनके कुछ पड़ोसियों के बीच एक इमारत के निर्माण को लेकर विवाद शुरू हुआ था। स्थानीय यूनियन परिषद के अध्यक्ष शिमुल बिल्लाह ने काम का ठेका मांगा था, लेकिन उनके परिवार ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
जान से मारने की धमकी
रूमा ने आरोप लगाया कि शिमुल ने अपने साथियों के जरिये उनसे पैसे ऐंठे और जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी।
शिमुल को बिलाल हुसैन का समर्थन!
उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के सदस्यों की हत्या में शामिल शिमुल को बिलाल हुसैन का समर्थन प्राप्त था, इसलिए उसे अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
भीड़ ने रूमा के परिवार की हत्या की: पुलिस
दूसरी ओर, पुलिस ने दावा किया कि नशीली दवाओं के कारोबार में कथित संलिप्तता के कारण भीड़ ने रूमा के परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी।
बीएनपी समर्थक होने के कारण जीतने नहीं दिया
रूमा ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा, उनकी मां ने दो बार यूनियन परिषद के अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था, लेकिन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की समर्थक होने के कारण उन्हें जीतने नहीं दिया गया। ईर्ष्या के कारण प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें नशीली दवाओं के झूठे मामले में फंसाया था। आसिफ महमूद ने सोमवार शाम को अपने सोशल मीडिया पर इन आरोपों को काल्पनिक बताया।