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डेटिंग या जुगाड़? जानिए क्‍या है ‘Hobosexuality’ और कैसे बढ़ रहा है भारत में इसका ट्रेंड

Hobosexuality Trend: जहां रिश्तों के मतलब में नए-नए ट्रेंड्स देखने को मिल रहे हैं, वहीं एक और ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है ‘Hobosexuality’, जहां लोग किसी से सिर्फ अपने मतलब के लिए रिलेशनशिप में आते हैं।

भारतAug 25, 2025 / 02:14 pm

MEGHA ROY

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फोटो सोर्स – Freepik

Hobosexuality Trend: आज के मॉडर्न लाइफस्टाइल में नए-नए बदलाव आ रहे हैं, यहां तक कि कपल्स के रिश्तों में भी।जहां रिश्तों के मतलब में नए-नए ट्रेंड्स देखने को मिल रहे हैं, वहीं एक और ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है ‘Hobosexuality’, जहां लोग किसी से सिर्फ अपने मतलब के लिए रिलेशनशिप में आते हैं।यह ट्रेंड अमेरिका और यूरोप से निकला है, और अब धीरे-धीरे मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली जैसे भारतीय शहरों में भी पांव पसार रहा है।सवाल यह है कि यह नया ट्रेंड क्या है, और क्या यह आज के रिश्तों की परिभाषा को बदल रहा है?आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ अहम जानकारियां।

क्या है Hobosexuality?

Hobosexual का मतलब होता है ऐसा व्यक्ति जो रोमांटिक रिश्ते को घर और सुविधाओं के जुगाड़ के तौर पर इस्तेमाल करता है।इस तरह के रिश्ते में बाहर से सब कुछ सामान्य और प्यारभरा दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर एक व्यक्ति पूरे बोझ को उठाता है चाहे वह किराया हो, बिल हो या रोजमर्रा की जिम्मेदारियां।

भारत में क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?

  • रियल एस्टेट रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़े शहरों में पिछले एक साल में मकानों की कीमतों में 10–14% तक का उछाल आया है।
  • मुंबई, दिल्ली या बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में 1BHK फ्लैट का किराया कई बार ₹35,000–₹50,000 तक पहुंच जाता है।
  • Deloitte की रिपोर्ट बताती है कि अकेले रहने वाले शहरी युवाओं की इनकम का 40–50% सिर्फ किराये में चला जाता है।
  • शहरी भीड़ में भी कई लोग अकेलेपन से जूझते हैं। ऊपर से जल्दी ‘सेटल’ होने का दबाव भी रिश्तों में जल्दीबाज़ी ला देता है।

ऐसे रिश्तों का असर

  • एक पार्टनर लगातार खर्च उठाता है, जिससे उसकी सेविंग और स्थिरता प्रभावित होती है।
  • जब जिम्मेदारियां बराबर न हों, तो रिश्ते में थकान और नाराज़गी बढ़ने लगती है।
  • जो पार्टनर घर या पैसा देता है, वही फैसलों पर हावी हो जाता है, और दूसरा भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ जाता है।

कैसे पहचानें Hobosexual रिश्ता?

  • पार्टनर का आर्थिक योगदान बहुत कम या न के बराबर हो।
  • घर का किराया, बिल या खर्चों में भागीदारी न दिखे।
  • आपकी प्रॉपर्टी या आर्थिक स्थिति में ज़्यादा दिलचस्पी ले, बजाय आपके व्यक्तित्व के।
  • जरूरत पड़ने पर भावनात्मक सपोर्ट न दे।
  • शुरुआत में बहुत ध्यान दे, लेकिन बाद में जिम्मेदारी से बचने लगे।

Hobosexuality बचने का क्या है समाधान?

  • रिश्ते की शुरुआत में ही आर्थिक और घरेलू जिम्मेदारियों पर साफ बात करें।
  • रिश्ता तभी स्वस्थ रहेगा, जब दोनों पार्टनर बराबर योगदान देंगे।
  • अगर रिश्ता एकतरफा लगने लगे, तो सीमाएं तय करना जरूरी है।
  • आर्थिक और भावनात्मक मजबूती रिश्तों में समझौते की मजबूरी कम करती है।

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