इस कार्यक्रम के लिए संघ ने अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, नेपाल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका और मुस्लिम देशों सहित 50 से अधिक देशों के राजदूतों को आमंत्रित किया है। कई अन्य देश शामिल हैं। इन देशों को 26 से 28 अगस्त के बीच नई दिल्ली में आयोजित होने वाले अपने शताब्दी वर्ष व्याख्यान शृंखला में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
2000 लोगों का होगा जुटान
आरएसएस ने संगठन के अपने बौद्धिक और सांस्कृतिक पक्ष को दुनिया के सामने रखने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया है। इसमें नेता, उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता, मीडिया मालिक सहित 17 से अधिक क्षेत्रों के लोगों को आमंत्रित किया गया है। इस प्रमुख कार्यक्रम में लगभग 2,000 लोगों के जुटने की संभावना है।
भाजपा सहयोगियों को बुलाया
संघ ने दूसरे दलों से आए और एनडीए सहयोगी दलों के नेताओं को इस अहम कार्यक्रम में बुलाया है। इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, रवनीत सिंह बिट्टू, अपना दल मुखिया और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, टीडीपी नेता और केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू, जदयू नेता केसी त्यागी, संजय झा के केसी त्यागी और संजय झा प्रमुख रूप से शामिल हैं। वहीं, न्यायाधीशों को भी न्योता दिया गया है।
विपक्षी नेताओं से भी संपर्क साधने की कही थी बात
RSS के प्रचार प्रभारी सुनील आंबेकर ने कुछ दिनों पहले सम्मेलन को लेकर कहा था कि हम अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा समाज के सभी वर्गों, समुदायों और विचारधारा के लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं। हम विपक्षी नेताओं को भी बुलाने के लिए संपर्क साध रहे हैं। आंबेकर ने कहा कि संघ ने अपनी 100 साल की यात्रा में समाज के हर तबके तक पहुंचने की कोशिश की है। संघ ने हमेशा यह विचार देने की कोशिश की है कि उसकी विचारधारा अलग नहीं है, बल्कि भारत की स्थापित परंपराओं में निहित है। आंबेकर ने कहा कि आरएसएस का दृष्टिकोण राष्ट्र की प्रगति के लिए सभी के साथ मिलकर काम करना है और संगठन चाहता है कि विकास की इस यात्रा में पूरा देश एक साथ आगे बढ़े।