चीन में SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे
यात्रा के दूसरे चरण में, पीएम मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह 2020 की गलवान झड़प के बाद उनकी पहली चीन यात्रा होगी, जो भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है। सम्मेलन के दौरान मोदी कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में शामिल हो सकते हैं, जिसमें शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अनौपचारिक मुलाकात की संभावना है। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है और 2022-23 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। यह मंच क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और आर्थिक विकास पर केंद्रित है।
भारत-चीन संबंधों में प्रगति
हाल ही में पीएम मोदी ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, पिछले साल कजान में शी जिनपिंग के साथ मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है। 2024 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात ने लद्दाख में LAC पर तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए थे। इस यात्रा से स्थिर और रचनात्मक संबंधों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण है।
जापान के साथ रणनीतिक साझेदारी
जापान के साथ भारत का विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का रिश्ता क्वाड (भारत, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) जैसे मंचों पर और मजबूत हुआ है। इस दौरे में जापान की E10 शिंकनसेन बुलेट ट्रेन तकनीक के हस्तांतरण पर समझौता संभावित है, जो भारत के बुनियादी ढांचे और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगा। यह सहयोग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को गति देगा।
कूटनीति में भारत की भूमिका
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और रूसी तेल खरीद को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। मोदी की यह यात्रा भारत की संतुलित विदेश नीति को दर्शाती है, जो पूर्वी एशिया में स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देती है। जापान और चीन के साथ यह कूटनीतिक जुड़ाव भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करेगा और क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग में नई संभावनाएं खोलेगा।