निम्न दाब क्षेत्र का असर हुआ कमजोर
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दाब क्षेत्र का प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर हो गया है। इस कारण यह सिस्टम पर्याप्त नमी लेकर उत्तर भारत की ओर नहीं बढ़ पाया। आमतौर पर ऐसे निम्न दाब क्षेत्र मानसून को मजबूत करते हैं और उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तरी भारत में वर्षा गतिविधि बढ़ जाती है। लेकिन इस बार यह सिस्टम दक्षिणी उड़ीसा और उत्तरी आंध्र प्रदेश तट से गुजरने के बाद कमजोर पड़ गया, जिससे मानसून ट्रफ लाइन (मानसून की अक्षीय रेखा) भी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसक गई है। इसका सीधा असर यह हुआ कि उत्तर भारत में मानसून की गति सुस्त पड़ गई है। अगले 3-4 दिन सूखे जैसे हालात
- मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 15 से 18 अगस्त तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश नहीं होगी।
- पूर्वी उत्तर प्रदेश (वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, प्रयागराज क्षेत्र) – हल्की और छिटपुट वर्षा संभव।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर) – 16 अगस्त को 1-2 स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा के आसार।
- केंद्रीय उत्तर प्रदेश (लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली) – बादल छाए रहेंगे लेकिन बारिश बहुत कम होगी।
- औसत वर्षा की संभावना: अगले चार दिनों में 4-6 मिमी से अधिक वर्षा होने के संकेत नहीं हैं, जबकि सामान्य परिस्थितियों में इस अवधि में 20-25 मिमी वर्षा होती है।
किसानों के लिए चेतावनी
- मौसम विभाग ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की है।
- इस समय धान की रोपाई का सीजन समाप्ति की ओर है, इसलिए खेत में अतिरिक्त सिंचाई का प्रबंध रखें।
- जिन क्षेत्रों में बारिश न हो वहां फसलों में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें।
- मौसम अनुकूल न होने पर कीटनाशकों का छिड़काव फिलहाल टालें।
- आर्द्रता कम रहने से तिलहन और दालों की फसल को रोग लगने की आशंका कम रहेगी, लेकिन धान की फसल पर नजर बनाए रखें।
वर्षा की कमी पर चिंता
- प्रदेश के कई जिलों में पहले से ही मानसून सीजन में औसत वर्षा कम दर्ज की जा रही है।
- पूर्वी उत्तर प्रदेश में अब तक 20-25% कम वर्षा हुई है।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15-18% तक कमी दर्ज की गई है।
- कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबी खिंचती है, तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
16 अगस्त को भारी बारिश का अलर्ट
IMD लखनऊ केंद्र के निदेशक जे.पी. गुप्ता के अनुसार, “मानसून फिलहाल कमजोर है, लेकिन 16 अगस्त को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में एक-दो स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है। इस दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। इसलिए किसानों और स्थानीय निवासियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।”
मानसून की सामान्य स्थिति
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल से प्रवेश करता है और धीरे-धीरे उत्तर भारत की ओर बढ़ता है। जुलाई और अगस्त इसके चरम महीने होते हैं, लेकिन इस साल जुलाई में अपेक्षित वर्षा न होने से कई राज्यों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से नीचे है। उत्तर प्रदेश में औसत मानसून वर्षा:
- पश्चिमी यूपी: 573 मिमी
- पूर्वी यूपी: 800 मिमी
- (लेकिन अब तक केवल 65-70% वर्षा ही दर्ज हुई है।)
आगामी पूर्वानुमान
- 15 अगस्त: अधिकतर जिलों में शुष्क मौसम, अधिकतम तापमान 33-35 डिग्री सेल्सियस।
- 16 अगस्त: पश्चिमी यूपी में भारी बारिश की संभावना।
- 17-18 अगस्त: छिटपुट बूंदाबांदी, कोई बड़ा सिस्टम सक्रिय नहीं।
मौसम विभाग का कहना है कि 19 अगस्त के बाद बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दाब क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का इंतजार जारी रहेगा। किसानों और आम लोगों को फिलहाल गर्म और उमसभरे मौसम का सामना करना पड़ेगा। केवल 16 अगस्त को सीमित क्षेत्रों में अच्छी वर्षा हो सकती है। अगर 19 अगस्त के बाद नया सिस्टम सक्रिय होता है तो राज्य में मानसून की वापसी हो सकती है।