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कांकेर

खूबसूरती से भरपूर नक्सलगढ़… यह है बस्तर का अनदेखा सबसे बड़ा हिल स्टेशन, खतरे के बीच खिलता प्राकृतिक सौंदर्य, जानें

Bastar Tourist Places: छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर क्षेत्र में प्रकृति का एक अनछुआ खजाना छिपा हुआ है, जिसका नाम है धारपारुम हिल स्टेशन। अगर आप छत्तीसगढ़ में किसी शांत, ठंडी और नैसर्गिक हिल स्टेशन की तलाश कर रहे हैं, तो यह आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। जानें इसके बारे में…

कांकेरJul 19, 2025 / 06:14 pm

Khyati Parihar

बस्तर का सबसे बड़ा हिल स्टेशन (फोटो सोर्स- Facebook)

बस्तर का सबसे बड़ा हिल स्टेशन (फोटो सोर्स- Facebook)

CG Tourism: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल को यूं ही धरती का स्वर्ग नहीं कहा जाता। यहां की धरती में वह जादू है, जो प्रकृति प्रेमियों, साहसिक पर्यटकों और शांति की तलाश में निकले यात्रियों को अपनी ओर खींच लाता है। घने जंगल, हरे-भरे पहाड़, झरने, गुफाएं और आदिवासी संस्कृति यह सब कुछ बस्तर को भारत के सबसे अनछुए लेकिन बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थलों में शामिल करता है।
बस्तर की घाटियां जब सर्दियों की दस्तक पर हरियाली की चादर ओढ़ लेती हैं, तब मिचनार घाटी, ककनार और बिंता घाटी जैसे स्थानों पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाती है। इन क्षेत्रों में बहती ठंडी हवाएं, सुबह की कोहरे से ढकी पगडंडियां और पक्षियों की चहचहाहट मिलकर किसी हिमालयी हिल स्टेशन की अनुभूति कराते हैं। इन सबके बीच एक ऐसा ही कम चर्चित लेकिन अत्यंत सुंदर हिल स्टेशन उत्तर बस्तर के कांकेर जिले की गोद में छिपा हुआ है, जिसके बारे में आपने भी नहीं सुना होगा। आइए इस लेख में जानें इस हिल स्टेशन के बारे में…

प्रकृति की गोद में बसा सौंदर्य ये हिल स्टेशन

नक्सलगढ़ में बस्तर का सबसे बड़ा खूबसूरत हिलस्टेशन धारपारुम, जिसे स्थानीय लोग उत्तर बस्तर का हिल स्टेशन कहते हैं, अब धीरे-धीरे पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध होता जा रहा है। यह स्थान न केवल अपनी नैसर्गिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यह क्षेत्र रोमांच और आत्मिक शांति का अनूठा संगम भी है। यहां की पहाड़ियां वर्ष भर हरियाली से ढकी रहती हैं। मानसून के समय यहां की घाटियों में जब बादल उतरते हैं और पहाड़ियों को स्पर्श करते हैं, तो दृश्य किसी स्वप्नलोक जैसा प्रतीत होता है। धारपारुम की ताजगी भरी हवा, ठंडे झरने और शांत वातावरण यात्रियों को आत्मिक रूप से तरोताजा कर देते हैं।

क्यों पड़ा इस हिल स्टेशन का नाम धारपारुम

स्थानीय लोगों की माने तो इस जगह का नाम धारपारुम इसलिए पड़ा क्योंकि पत्थरों के बीच से पानी की धार बहती है। वहीं जिला प्रशासन ने धारपारुम को विकसित करने का आश्वासन दिया है।
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जलप्रपात और गुफाओं का क्षेत्र

धारपारुम के आस-पास अनेक जलप्रपात और प्राकृतिक गुफाएं भी हैं। यहां का सबसे प्रमुख जलप्रपात हांदावाड़ा है, जहां वर्ष भर पानी बहता रहता है। इसकी गूंजती आवाज और गिरते पानी की ठंडी बौछारें मन को मोह लेती हैं। चित्रकोट जलप्रपात, जिसे छत्तीसगढ़ का ‘नियाग्रा’ कहा जाता है, भी इस क्षेत्र से अधिक दूर नहीं है और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। प्राकृतिक गुफाएं जैसे कि ककनार गुफा, बस्तर की जैव-विविधता और भूगर्भीय विशेषताओं को भी उजागर करती हैं।

ऐसे पहुंचे धारपारुम

जिला मुख्यालय कांकेर से 40 किमी दूर कानागांव के पहाड़ी जंगलों में धारपारुम हिल स्टेशन स्थित है। यहां मुख्यालय से उसेली होते हुए पहुंचा जा सकता है। हालांकि यहां पहुचने के किए आपको 5 किमी कच्ची पगडंडी रास्तों को पार करना होगा, लेकिन जब इस कच्ची पगडंडी रास्तों को पार कर पहुंचेंगे तो इस धारपारुम हिल स्टेशन की खूबसूरती देख सारी थकान दूर हो जाएगी। हालांकि वायुमार्ग से भी इस हिल स्टेशन तक आया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आपको राजधानी रायपुर या फिर जगदलपुर आना होगा। फिर वहां से सड़क मार्ग के जरिए कांकेर आकर धारपारुम पहुंचा जा सकता है।
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मन मोह लेती है ये हिल स्टेशन

धारपारुम हिल स्टेशन में सड़क और वायु मार्ग दोनों से आया जा सकता है। धारपारुम पहुंचने पर आपको कई किलोमीटर दूर तक फैला पठारीय क्षेत्र मिलेगा, जो इसके व्‍यू प्‍वांइट को और भी खास बनाता है। धारपारुम हिल स्टेशन आकर इस स्‍थान से आसपास के नजारें आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। छोटे बड़े पहाड़ों की श्रृंखलाएं किसी के भी मन को प्रफुल्लित कर देंगी। इसलिए यहां आने वाले पर्यटक काफी देर तक इस जगह पर रुकना चाहते हैं, ताकि कुदरत की खूबसूरती अपनी आंखों में उतार सकें। इसलिए एक बार यहां पहुंचने वाले सैलानी बार-बार इस जगह पर आना चाहते हैं।

नक्सल प्रभाव के कारण लोगों की नजरों से ओझल

आपको बता दें कि नक्सल प्रभाव के कारण लोगों की नजरों से अब तक धारपारुम हिल स्टेशन ओझल रहा है। नक्सलवाद जब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है, उत्तर बस्तर खूबसूरती उभर कर सामने आ रही है। अब जरूरत है इन स्थानों को डेवलप करने कि ताकि देश ही नहीं विदेश के सैलानी यहां का दीदार कर सके।

स्थानीय लोगों को भी उम्मीद

यह इलाका आदिवासी बाहुल्य है और यहां के लोग अब पर्यटन के माध्यम से रोजगार की संभावनाएं देख रहे हैं। यदि यहां आधारभूत संरचनाओं जैसे सड़क, पेयजल, लाइट, मोबाइल नेटवर्क आदि की सुविधा दी जाए तो यह क्षेत्र आत्मनिर्भर भी बन सकता है और राज्य के पर्यटन नक्शे पर मजबूती से उभर सकता है।

क्या है खास?

प्राकृतिक ठंडक: धारपारुम की ऊंचाई पर बसे होने के कारण यहां का मौसम अधिकतर समय ठंडा और सुहावना बना रहता है, खासकर अक्टूबर से फरवरी तक।

घाटियां और जंगल: चारों ओर फैली हरियाली, गहराई में जाती घाटियां और ऊँचाई से दिखते जंगल – ये दृश्य आंखों को सुकून देते हैं।
बादलों की चादर: खासकर सुबह के समय घाटी में उतरते बादल और सूरज की पहली किरण जब इन पर पड़ती है, तो दृश्य एक हिल स्टेशन की अनुभूति कराता है।

फोटोग्राफी का स्वर्ग: नेचर, ट्रैवल और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स के लिए धारपारुम एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

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